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Corporate Panchtantra

SURVIVAL-GUIDE -हर नौकरीवाले के लिए अनिवार्य
बहुत कुछ सिखाया जाता है हमें स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों में, फिर भी कुछ बातें कहीं भी औपचारिक तौर पर नहीं समझायी-सिखायी जाती। वह कहते हैं ना कि प्रेम को स्कूल में ना सिखाया जाता, (हालांकि अब तो तमाम रेडियो चैनलों पर लव-गुरु लव भी सिखाने लगे हैं)। कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है कि किसी भी दफ्तर में, किसी नौकरी में बचे रहने के गुर, दूसरों की चमचागिरी से आपको होनेवाले नुकसानों को समझने का हुनर किसी कोर्स में नहीं सिखाया जाता। दफ्तर में चुगलीबाजी किस तरह से प्रेक्टिस की जाती है और उसके दुष्परिणामों से आप खुद को कैसे बचायें, यह किसी किताब में नहीं सिखाया जाता। बास को कैसे-कैसे साधा जाता है, ऐसे बहुत से हुनर-फन बंदा अपनी प्रतिभा-प्रेक्टिस से सीखता है। जिसमें प्रतिभा-समझ ना होती, वो मर जाता है। कमजोर की मौत है, अज्ञानी की मौत है। यह किताब ज्ञान बांटने की एक कोशिश है। किसी भी दफ्तर में चलनेवाली हर किस्म की चमचागिरी, चुगलखोरी, प्रमोशन वगैरह के पीछे की पालिटिक्स क्या है, इसे समझना हर उस बंदे या बंदी के लिए जरुरी है, जो किसी भी दफ्तर में बचा रहना चाहता है, प्रमोशन पाते रहना चाहता है।
इस किताब की 44 कहानियों से हर इंपलाई, हर नौकरीशुदा, हर आम आदमी दुनियादारी का ऐसे सबक हासिल कर सकता है, जो किसी भी कोर्स में नहीं दिये जाते।
सो इस किताब को पढ़िये और लाइफ में आगे बढ़िये, बस यह किताब किसी के साथ शेयर मत कीजिये। शेयर करके कोई समझदार हो गया, तो आपका एक कंपटीटर फोकटी में खड़ा हो जायेगा।

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