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आकांक्षा by धनंजय चौधरी

उसका यूँ रूठ के जाना
यूँ मुझसे दूर जाना
खवाबों का टूट जाना 
उसका रूठ के जाना
यूँ मुझे रुलाना 
मेरा दिल दुखाना 
उसका रूठ के जाना 
यूँ मुझे सताना
मेरी नींदे चुराना
उसका रूठ के जाना 
न मंजिल का पता
न मेरा ठिकाना
ये दिल है तन्हा 
हो जायेगा दीवाना 
वो ऑंखें नशीली
वो चेहरा गुलाबी
उसके ख्यालों में
ये दिल है तन्हा

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