मैं कल्कि अवतार बोल रहा हूँ
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विषय-सूची
भूमिका
01. धर्म शास्त्र कथन
सनातन / हिन्दू शास्त्र व मान्यता के अनुसार
अ. वेद व पुराण के अनुसार
ब. महर्षिदयानन्द के अनुसार
स. पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार
द. नाड़ी ताड़ पत्ते (Nadi Palm Leaves) के अनुसार
य. अन्य के अनुसार
बौद्ध धर्म के अनुसार
यहूदी शास्त्र के अनुसार
ईसाई शास्त्र के अनुसार
इस्लाम शास्त्र के अनुसार
सिक्ख धर्म के अनुसार
मायां कैलण्डर के अनुसार
02. भविष्यवक्ता कथन
प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस के अनुसार
ज्योतिषि श्री बेजन दारूवाला के अनुसार
पुस्तक- ”अमर भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
पुस्तक- ”विश्व की आश्चर्यजनक भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
पुस्तक- ”दुर्लभ भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
अन्य भविष्यवक्ताओं के अनुसार
युग परिवर्तन और परिवर्तनकर्ता का शास्त्र व भविष्यवाणियों के आँकड़ों पर व्याख्या
03. विश्वात्मा/ विश्वमन का विखण्डन व संलयन
सांख्य दर्शन
धर्म विज्ञान (स्वामी विवेकानन्द)
आत्मा और विश्वात्मा
रज मन
तम मन
सत्व मन अ. निवृत्ति मार्गी ब. प्रवृत्ति मार्गी
अवतारी मन
मानव और पूर्ण मानव
विकासवाद और अवतारवाद
04. शास्त्र और धर्मशास्त्र
”सम्पूर्ण मानक“ का विकास भारतीय आध्यात्म-दर्शन का मूल और अन्तिम लक्ष्य
लेखक/शास्त्राकार, शास्त्र और महर्षि वेदव्यास
लेखकों के आदि पुरूष प्रतीक व्यास
महर्षि वेदव्यास शास्त्र लेखन कला
युगानुसार धर्म, प्रवर्तक और धर्मशास्त्र
व्यष्टि और समष्टि धर्मशास्त्र
शास्त्रार्थ, शास्त्र पर होता है, शास्त्राकार से और पर नहीं
05. काशी
शिव
तीसरी आँख (Third Eye)
योगेश्वर (ज्ञान का विश्वरूप) और भोगेश्वर (कर्मज्ञान का विश्वरूप)
ज्योतिर्लिंग : अर्थ और द्वादस (12) ज्योतिर्लिंग
ज्योतिर्लिंगों का स्थान
काशी
मोक्षदायिनी काशी और जीवनदायिनी सत्यकाशी : अर्थ व प्रतीक चिन्ह
मोक्षदायिनी काशी (www.kashikatha.com)
मोक्षदायिनी काशी: पंचम, प्रथम एवं सप्तम काशी
मोक्षदायिनी काशी: वाराणसी
विश्वेश्वर (योगेश्वरनाथ): प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों?
जीवनदायिनी सत्यकाशी (satyakashi.com)
जीवनदायिनी सत्यकाशी - पंचम, अन्तिम और सप्तम काशी
जीवनदायिनी सत्यकाशी: वाराणसी-विन्ध्याचल-शिवद्वार-सोनभद्र के बीच का क्षेत्र
भोगेश्वरनाथ: 13वाँ और अन्तिम ज्योतिर्लिंग क्यों?
06. ईश्वर, अवतार और पुनर्जन्म
ईश्वर, ईश्वर का संक्षिप्त इतिहास और ईश्वर के अवतार
अवतार और पुनर्जन्म
ईश्वर के अवतार
ब्रह्मा के अवतार
विष्णु के अवतार
शंकर के अवतार
ईश्वर या काल चक्र
सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त के अनुसार काल, युग बोध एवं अवतार
सुखसागर के अनुसार भगवान विष्णु चौबीस अवतार
07. मनु और कल्कि अवतार
मनु और मनवन्तर
काल और युग परिवर्तक कल्कि अवतार
कल्कि अवतार, महाअवतार क्यों?
कल्कि महाअवतार एवं अन्य स्वघोषित कल्कि अवतार
कल्कि अवतार और लव कुश सिंह “विश्वमानव”
अदृश्य काल में विश्वात्मा का प्रथम जन्म - योगेश्वर श्री कृष्ण
दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का पहला भाग - स्वामी विवेकानन्द
दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का अन्तिम भाग - भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“
बुड्ढा कृष्ण - कृष्ण का भाग दो और अन्तिम
एक ही मानव शरीर के जीवन, ज्ञान और कर्म के विभिन्न विषय क्षेत्र से मुख्य नाम
08. सत्य शास्त्र : समष्टि शास्त्र
विश्वशास्त्र की स्थापना
शास्त्रकार श्री लव कुश सिंह विश्वमानव
रचना क्यों?
आविष्कार किस प्रकार हुआ?
उपयोगिता क्या है?
बाद का मनुष्य, समाज और शासन
कितना छोटा और कितना बड़ा?
एक ही शास्त्र-साहित्य के विभिन्न नाम
विश्वव्यापी स्थापना का स्पष्ट मार्ग
सम्बन्धित स्थान?
उत्पन्न नयी प्रणाली और व्यापार
कल्कि महाअवतार से उत्पन्न नयी प्रणाली और व्यापार
विश्व सरकार के लिए पुनः भारत द्वारा शून्य आधारित अन्तिम आविष्कार
09. सत्य एकीकरण
ये घटना क्रम क्या बता रहा है?
श्रीकृष्ण व महाभारत काल
श्री राम कृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानन्द काल
पूर्व स्वतन्त्र भारत काल
स्वतन्त्र भारत काल में नेतृत्वकर्ताओं के विचार
वर्तमान समय - इतिहास लौट चुका है
आध्यात्मिक सत्य एवं दार्शनिक आधार पर अन्तिम सत्य दृष्टि
परिचालन प्रणाली (Operating System)
भारतीय संविधान
भारतीय संसद
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
भारतीय शिक्षा प्रणाली
भारतीय विपणन प्रणाली
भारतीय मीडिया (चौथा स्तम्भ - पत्रकारिता)
सहस्त्राब्दि विश्व शान्ति सम्मेलन
एक भारत - श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य
क्या नई घटना घटित हुई थी 21 दिसम्बर, 2012 को?
10. सत्य वार्ता
विश्वमानव से वार्ता - 1
विश्वमानव से वार्ता - 2
विश्वमानव से वार्ता – 3
11. सत्य वक्तव्य
विश्व शान्ति के लिए मन का मानकीकरण केवल शब्द नहीं बल्कि उसके मानक का निर्धारण व प्रकाशन हो चुका है।
मैं भारत और अमेरिका के हताश होने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ
रचनात्मक पत्रकारिता - पत्रकारिता का सत्य-रूप
21 दिसम्बर, 2012 को सर्वनाश नहीं बल्कि पाँचवें युग - स्वर्ण युग और सत्यकाशी तीर्थ प्रकट हुआ है
मेरे विश्व शान्ति के कार्य हेतु बनाये गये पाँच ट्रस्ट मानवता के लिए सत्य-कार्य एवं दान के लिए सुयोग्य पात्र
12. सत्य अर्थ और सत्य-मार्गदर्शन
सत्य अर्थ
सम्बन्ध का सत्य आधार
सिर्फ ज्ञानी होना कालानुसार अयोग्यता ही नही सृष्टि में बाधक भी
निर्माण के मार्ग और पूर्वी तथा पश्चिमी देशों के स्वभाव
मैं भविष्य या तू भूत? और वर्तमान का सत्य अर्थ
आस्था या मूर्खता? और आस्था का सत्य अर्थ
”निर्माण और उत्पादन“ भावना की उपयोगिता
विद्रोही या सार्वजनिक प्रमाणित कृष्णकला समाहित विश्वमानव कला
भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ को आह्वान
ईश्वर, देवता और विज्ञान
पहले संविधान या मनुष्य?
नया, पुराना और वर्तमान
मुझे (आत्मा) को प्राप्त करने का मार्ग
प्राथमिकता किसकी- चरित्र की या सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त की?
व्यक्त होने का कारण और व्यक्त होने में कष्ट
कालजयी, जीवन और व्यर्थ साहित्य
भाग्य और कर्म
सफलता की सरल और कालानुसार विधि
ध्यान अभ्यास की कालानुसार विधि
अवतार, महापुरूष और साधारण मानव
मनुष्य जीवन के प्रकार
गुरू के प्रकार
व्यक्तिवाद और मानवतावाद
विश्वरूप एवं दिव्यरूप
ऋषि और ऋषि परम्परा
”बहुत पहुँचे हुये हैं“, ”दर्शन“ और ”आशीर्वाद“
जीवन जीने की विधि
आशीर्वाद
इच्छा और आकड़ा
सत्य-मार्गदर्शन
13. सत्य सुर
ब्लैक होल और आत्मा
श्रीमद्भगवद्गीता की शक्ति सीमा तथा कर्मवेद : पंचमवेद समाहित विश्वशास्त्र के प्रारम्भ का आधार
कालभैरव कथा : यथार्थ दृष्टि
गीता नहीं बल्कि कर्मवेद : पंचमवेद समाहित विश्वशास्त्र राष्ट्रीय-वैश्विक शास्त्र-साहित्य है।
मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
लक्ष्य: गणराज्यों का संघ - देश और देशों का संघ - विश्व राष्ट्र
स्वच्छ मन - स्वच्छ भारत - स्वस्थ भारत के लिए कल्कि महाअवतार के नौ रत्न
मैं-विश्वात्मा ने भारतीय संविधान की धारा-51 (ए) : नागरिक का मौलिक कर्तव्य अनुसार अपना धर्म कर्तव्य निभाया
14. सत्य दिशा-बोध
ईश्वर, अवतार और मानव की शक्ति सीमा
क्यों असम्भव था व्यक्ति, संत-महात्माओं-धर्माचार्यों, राजनेताओं और विद्वानों द्वारा यह अन्तिम कार्य?
”सम्पूर्ण मानक“ के विश्वव्यापी स्थापना का स्पष्ट मार्ग
नागरिकों को आह्वान
विचारकों को आह्वान
शिक्षण क्षेत्र से जुड़े आचार्यों को आह्वान
प्रबंध शिक्षा क्षेत्र को आह्वान
शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माता को आह्वान
पत्रकारिता को आह्वान
मानकीकरण संगठन और औद्योगिक जगत को आह्वान
फिल्म निर्माण उद्योग को आह्वान
धर्म क्षेत्र को आह्वान
राजनीतिक दलों को आह्वान
सरकार / शासन को आह्वान
संसद को आह्वान
सर्वोच्च न्यायालय को आह्वान
क्या है जनहित याचिका (PIL-Public Interest Litigation)
जनहित याचिका - 01. पूर्ण शिक्षा का अधिकार
जनहित याचिका - 02. राष्ट्रीय शास्त्र
जनहित याचिका - 03. नागरिक मन निर्माण का मानक
जनहित याचिका - 04. सार्वजनिक प्रमाणित सत्य-सिद्धान्त
जनहित याचिका - 05. गणराज्य का सत्य रूप
15. सत्य आमंत्रण
पाँचवें युग - स्वर्णयुग के तीर्थ सत्यकाशी क्षेत्र में प्रवेश का आमंत्रण
पाँचवें युग - स्वर्णयुग में प्रवेश का आमंत्रण
16. सत्य चुनौति
अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“ का मानवों के नाम खुला चुनौति पत्र
17. सत्य सन्देश
अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“ का काशी-सत्यकाशी क्षेत्र से विश्वशान्ति का अन्तिम सत्य-सन्देश
18. सत्य प्रवाह
समय प्रवाह/आत्मीय बल
जैसी तुम्हारी इच्छा वैसा करो
विषय-सूची
भूमिका
01. धर्म शास्त्र कथन
सनातन / हिन्दू शास्त्र व मान्यता के अनुसार
अ. वेद व पुराण के अनुसार
ब. महर्षिदयानन्द के अनुसार
स. पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार
द. नाड़ी ताड़ पत्ते (Nadi Palm Leaves) के अनुसार
य. अन्य के अनुसार
बौद्ध धर्म के अनुसार
यहूदी शास्त्र के अनुसार
ईसाई शास्त्र के अनुसार
इस्लाम शास्त्र के अनुसार
सिक्ख धर्म के अनुसार
मायां कैलण्डर के अनुसार
02. भविष्यवक्ता कथन
प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस के अनुसार
ज्योतिषि श्री बेजन दारूवाला के अनुसार
पुस्तक- ”अमर भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
पुस्तक- ”विश्व की आश्चर्यजनक भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
पुस्तक- ”दुर्लभ भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
अन्य भविष्यवक्ताओं के अनुसार
युग परिवर्तन और परिवर्तनकर्ता का शास्त्र व भविष्यवाणियों के आँकड़ों पर व्याख्या
03. विश्वात्मा/ विश्वमन का विखण्डन व संलयन
सांख्य दर्शन
धर्म विज्ञान (स्वामी विवेकानन्द)
आत्मा और विश्वात्मा
रज मन
तम मन
सत्व मन अ. निवृत्ति मार्गी ब. प्रवृत्ति मार्गी
अवतारी मन
मानव और पूर्ण मानव
विकासवाद और अवतारवाद
04. शास्त्र और धर्मशास्त्र
”सम्पूर्ण मानक“ का विकास भारतीय आध्यात्म-दर्शन का मूल और अन्तिम लक्ष्य
लेखक/शास्त्राकार, शास्त्र और महर्षि वेदव्यास
लेखकों के आदि पुरूष प्रतीक व्यास
महर्षि वेदव्यास शास्त्र लेखन कला
युगानुसार धर्म, प्रवर्तक और धर्मशास्त्र
व्यष्टि और समष्टि धर्मशास्त्र
शास्त्रार्थ, शास्त्र पर होता है, शास्त्राकार से और पर नहीं
05. काशी
शिव
तीसरी आँख (Third Eye)
योगेश्वर (ज्ञान का विश्वरूप) और भोगेश्वर (कर्मज्ञान का विश्वरूप)
ज्योतिर्लिंग : अर्थ और द्वादस (12) ज्योतिर्लिंग
ज्योतिर्लिंगों का स्थान
काशी
मोक्षदायिनी काशी और जीवनदायिनी सत्यकाशी : अर्थ व प्रतीक चिन्ह
मोक्षदायिनी काशी (www.kashikatha.com)
मोक्षदायिनी काशी: पंचम, प्रथम एवं सप्तम काशी
मोक्षदायिनी काशी: वाराणसी
विश्वेश्वर (योगेश्वरनाथ): प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों?
जीवनदायिनी सत्यकाशी (satyakashi.com)
जीवनदायिनी सत्यकाशी - पंचम, अन्तिम और सप्तम काशी
जीवनदायिनी सत्यकाशी: वाराणसी-विन्ध्याचल-शिवद्वार-सोनभद्र के बीच का क्षेत्र
भोगेश्वरनाथ: 13वाँ और अन्तिम ज्योतिर्लिंग क्यों?
06. ईश्वर, अवतार और पुनर्जन्म
ईश्वर, ईश्वर का संक्षिप्त इतिहास और ईश्वर के अवतार
अवतार और पुनर्जन्म
ईश्वर के अवतार
ब्रह्मा के अवतार
विष्णु के अवतार
शंकर के अवतार
ईश्वर या काल चक्र
सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त के अनुसार काल, युग बोध एवं अवतार
सुखसागर के अनुसार भगवान विष्णु चौबीस अवतार
07. मनु और कल्कि अवतार
मनु और मनवन्तर
काल और युग परिवर्तक कल्कि अवतार
कल्कि अवतार, महाअवतार क्यों?
कल्कि महाअवतार एवं अन्य स्वघोषित कल्कि अवतार
कल्कि अवतार और लव कुश सिंह “विश्वमानव”
अदृश्य काल में विश्वात्मा का प्रथम जन्म - योगेश्वर श्री कृष्ण
दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का पहला भाग - स्वामी विवेकानन्द
दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का अन्तिम भाग - भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“
बुड्ढा कृष्ण - कृष्ण का भाग दो और अन्तिम
एक ही मानव शरीर के जीवन, ज्ञान और कर्म के विभिन्न विषय क्षेत्र से मुख्य नाम
08. सत्य शास्त्र : समष्टि शास्त्र
विश्वशास्त्र की स्थापना
शास्त्रकार श्री लव कुश सिंह विश्वमानव
रचना क्यों?
आविष्कार किस प्रकार हुआ?
उपयोगिता क्या है?
बाद का मनुष्य, समाज और शासन
कितना छोटा और कितना बड़ा?
एक ही शास्त्र-साहित्य के विभिन्न नाम
विश्वव्यापी स्थापना का स्पष्ट मार्ग
सम्बन्धित स्थान?
उत्पन्न नयी प्रणाली और व्यापार
कल्कि महाअवतार से उत्पन्न नयी प्रणाली और व्यापार
विश्व सरकार के लिए पुनः भारत द्वारा शून्य आधारित अन्तिम आविष्कार
09. सत्य एकीकरण
ये घटना क्रम क्या बता रहा है?
श्रीकृष्ण व महाभारत काल
श्री राम कृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानन्द काल
पूर्व स्वतन्त्र भारत काल
स्वतन्त्र भारत काल में नेतृत्वकर्ताओं के विचार
वर्तमान समय - इतिहास लौट चुका है
आध्यात्मिक सत्य एवं दार्शनिक आधार पर अन्तिम सत्य दृष्टि
परिचालन प्रणाली (Operating System)
भारतीय संविधान
भारतीय संसद
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
भारतीय शिक्षा प्रणाली
भारतीय विपणन प्रणाली
भारतीय मीडिया (चौथा स्तम्भ - पत्रकारिता)
सहस्त्राब्दि विश्व शान्ति सम्मेलन
एक भारत - श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य
क्या नई घटना घटित हुई थी 21 दिसम्बर, 2012 को?
10. सत्य वार्ता
विश्वमानव से वार्ता - 1
विश्वमानव से वार्ता - 2
विश्वमानव से वार्ता – 3
11. सत्य वक्तव्य
विश्व शान्ति के लिए मन का मानकीकरण केवल शब्द नहीं बल्कि उसके मानक का निर्धारण व प्रकाशन हो चुका है।
मैं भारत और अमेरिका के हताश होने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ
रचनात्मक पत्रकारिता - पत्रकारिता का सत्य-रूप
21 दिसम्बर, 2012 को सर्वनाश नहीं बल्कि पाँचवें युग - स्वर्ण युग और सत्यकाशी तीर्थ प्रकट हुआ है
मेरे विश्व शान्ति के कार्य हेतु बनाये गये पाँच ट्रस्ट मानवता के लिए सत्य-कार्य एवं दान के लिए सुयोग्य पात्र
12. सत्य अर्थ और सत्य-मार्गदर्शन
सत्य अर्थ
सम्बन्ध का सत्य आधार
सिर्फ ज्ञानी होना कालानुसार अयोग्यता ही नही सृष्टि में बाधक भी
निर्माण के मार्ग और पूर्वी तथा पश्चिमी देशों के स्वभाव
मैं भविष्य या तू भूत? और वर्तमान का सत्य अर्थ
आस्था या मूर्खता? और आस्था का सत्य अर्थ
”निर्माण और उत्पादन“ भावना की उपयोगिता
विद्रोही या सार्वजनिक प्रमाणित कृष्णकला समाहित विश्वमानव कला
भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ को आह्वान
ईश्वर, देवता और विज्ञान
पहले संविधान या मनुष्य?
नया, पुराना और वर्तमान
मुझे (आत्मा) को प्राप्त करने का मार्ग
प्राथमिकता किसकी- चरित्र की या सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त की?
व्यक्त होने का कारण और व्यक्त होने में कष्ट
कालजयी, जीवन और व्यर्थ साहित्य
भाग्य और कर्म
सफलता की सरल और कालानुसार विधि
ध्यान अभ्यास की कालानुसार विधि
अवतार, महापुरूष और साधारण मानव
मनुष्य जीवन के प्रकार
गुरू के प्रकार
व्यक्तिवाद और मानवतावाद
विश्वरूप एवं दिव्यरूप
ऋषि और ऋषि परम्परा
”बहुत पहुँचे हुये हैं“, ”दर्शन“ और ”आशीर्वाद“
जीवन जीने की विधि
आशीर्वाद
इच्छा और आकड़ा
सत्य-मार्गदर्शन
13. सत्य सुर
ब्लैक होल और आत्मा
श्रीमद्भगवद्गीता की शक्ति सीमा तथा कर्मवेद : पंचमवेद समाहित विश्वशास्त्र के प्रारम्भ का आधार
कालभैरव कथा : यथार्थ दृष्टि
गीता नहीं बल्कि कर्मवेद : पंचमवेद समाहित विश्वशास्त्र राष्ट्रीय-वैश्विक शास्त्र-साहित्य है।
मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
लक्ष्य: गणराज्यों का संघ - देश और देशों का संघ - विश्व राष्ट्र
स्वच्छ मन - स्वच्छ भारत - स्वस्थ भारत के लिए कल्कि महाअवतार के नौ रत्न
मैं-विश्वात्मा ने भारतीय संविधान की धारा-51 (ए) : नागरिक का मौलिक कर्तव्य अनुसार अपना धर्म कर्तव्य निभाया
14. सत्य दिशा-बोध
ईश्वर, अवतार और मानव की शक्ति सीमा
क्यों असम्भव था व्यक्ति, संत-महात्माओं-धर्माचार्यों, राजनेताओं और विद्वानों द्वारा यह अन्तिम कार्य?
”सम्पूर्ण मानक“ के विश्वव्यापी स्थापना का स्पष्ट मार्ग
नागरिकों को आह्वान
विचारकों को आह्वान
शिक्षण क्षेत्र से जुड़े आचार्यों को आह्वान
प्रबंध शिक्षा क्षेत्र को आह्वान
शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माता को आह्वान
पत्रकारिता को आह्वान
मानकीकरण संगठन और औद्योगिक जगत को आह्वान
फिल्म निर्माण उद्योग को आह्वान
धर्म क्षेत्र को आह्वान
राजनीतिक दलों को आह्वान
सरकार / शासन को आह्वान
संसद को आह्वान
सर्वोच्च न्यायालय को आह्वान
क्या है जनहित याचिका (PIL-Public Interest Litigation)
जनहित याचिका - 01. पूर्ण शिक्षा का अधिकार
जनहित याचिका - 02. राष्ट्रीय शास्त्र
जनहित याचिका - 03. नागरिक मन निर्माण का मानक
जनहित याचिका - 04. सार्वजनिक प्रमाणित सत्य-सिद्धान्त
जनहित याचिका - 05. गणराज्य का सत्य रूप
15. सत्य आमंत्रण
पाँचवें युग - स्वर्णयुग के तीर्थ सत्यकाशी क्षेत्र में प्रवेश का आमंत्रण
पाँचवें युग - स्वर्णयुग में प्रवेश का आमंत्रण
16. सत्य चुनौति
अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“ का मानवों के नाम खुला चुनौति पत्र
17. सत्य सन्देश
अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“ का काशी-सत्यकाशी क्षेत्र से विश्वशान्ति का अन्तिम सत्य-सन्देश
18. सत्य प्रवाह
समय प्रवाह/आत्मीय बल
जैसी तुम्हारी इच्छा वैसा करो