Ghar Ghar ho Swami Simandhar
ठाणे त्रिमंदिर प्राण-प्रतिष्ठा गीत (२०२६)
दादा भगवान के अक्रम विज्ञान से हम,
त्रिमंदिर के अनुसंधान से हम,
अहो ! आएंगे चरणों में, आप के ही शरणों में, परम तारक परमेश्वर!
कण-कण में स्वामी, दर्शन में स्वामी, घर-घर हो स्वामी सीमंधर !
प्रभु ! पल-पल हो भक्ति, भक्ति से मुक्ति, मुक्ति से होना है सिध्धेश्वर ! (2)
ठाणे त्रिमंदिर से पायें, जन-गण शाश्वत शांति !
शिवजी और विठ्ठल संग में... तीर्थ ये निष्पक्षपाती !
आई तुळजा, गणराया, करिए भीतर के भावों की पूर्ति !
कण-कण में स्वामी, दर्शन में स्वामी, घर-घर हो स्वामी सीमंधर !
प्रभु ! पल-पल हो भक्ति, भक्ति से मुक्ति, मुक्ति से होना है सिध्धेश्वर!!
कणाकणांत स्वामी, दर्शनात स्वामी, घराघरांत स्वामी सीमंधर !
प्रभु ! क्षणोक्षणी भक्ती, भक्तीतून मुक्ती, मुक्तीतून होईन सिद्धेश्वर !
बोई, कई अवतार आपने भावना जग कल्याणी...
कोई जीव आहत न हो, कोड भरी मधुरी वाणी...
आप की शरण में आना, अंतिम आस हमारी !
हर-पल है सूनी, आप के बिन स्वामी, दर्शन की प्यास, परमेश्वर !
स्वामी ! एक-एक कर्मों से, मुक्ति को पाना है, चरणों में आना है, सीमंधर !
प्रत्येक क्षण सूना स्वामी तुझ्या विना, दर्शनाची आस आहे, परमेश्वर !
कर्म पाश तोडून तुज चरणी येऊ… शरणी घ्या आम्हाला सीमंधर
दादा भगवान के अक्रम विज्ञान से हम,
त्रिमंदिर के अनुसंधान से हम,
अहो ! आएंगे चरणों में, आप के ही शरणों में, परम तारक परमेश्वर !
कण-कण में स्वामी, दर्शन में स्वामी, घर-घर हो स्वामी सीमंधर !
प्रभु ! पल-पल हो भक्ति, भक्ति से मुक्ति, मुक्ति से होना है सिध्धेश्वर ! (2)