हाडळ — जो लौटी नहीं
महाराष्ट्र के गांवों में सदियों से सुनी जाने वाली एक स्त्री-आत्मा की लोककथा — 'हाडळ'। यह ईबुक दो हिस्सों में है: पहला भाग हाडळ की मान्यता, उसकी उत्पत्ति, क्षेत्रीय विविधताएं और आधुनिक दृष्टिकोण को गहराई से समझाता है। दूसरा भाग इसी लोककथा से प्रेरित एक मौलिक भयकथा है — एक गांव, एक पुराना कुआं, और चालीस साल पुराना एक राज़।
सभी पात्र, गांव और घटनाएं काल्पनिक हैं। यह किताब अंधविश्वास फैलाने के लिए नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति को समझने और एक अच्छी भय-कथा का आनंद देने के लिए लिखी गई है।
फॉर्मेट: PDF | भाषा: हिंदी | पृष्ठ: 63 | लेखक: रवीन्द्र मंडेलिया