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विस्तार वाद फासीवाद ओर विस्तार वाद का संकट

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📖 पुस्तक के बारे में




यह पुस्तक किसी का पक्ष या विपक्ष नहीं है। यह एक शोध-दृष्टि है जो पूछती है — आज की दुनिया में हिंसा, विस्तारवाद और असमानता के पीछे कौन-सी वैचारिक जड़ें हैं?




क्या पश्चिमी व्यक्तिवाद (Individualism) एक सार्वभौमिक आदर्श है — या एक विशेष सभ्यतागत उपकरण? क्या वसुधैव कुटुम्बकम् जैसी भारतीय दार्शनिक दृष्टि आज की भू-राजनीति को कोई वैकल्पिक आधार दे सकती है?




📚 इस पुस्तक में:

• पश्चिमी व्यक्तिवाद का उद्भव और सीमाएँ (हॉब्स, लॉक, Piketty)

• मानवाधिकार की अवधारणा — पश्चिमी परियोजना या सार्वभौमिक सत्य?

• विस्तारवाद के ऐतिहासिक और समकालीन रूप

• फासीवाद की नई परिभाषाएँ — राज्य, बाज़ार, मीडिया

• अमेरिका, इज़राइल, ईरान — तीन केस स्टडी

• दक्षिण एशिया में दंगे और DNT/बंजारा अधिकार

• भारतीय सभ्यता का राजनीतिक दर्शन

• वसुधैव कुटुम्बकम् — एक वैकल्पिक विश्व-व्यवस्था




✍️ लेखक: अजय सिंह चौहान

🏛️ प्रकाशन: GBSBFORYOU Publications, भोपाल, मध्यप्रदेश

📅 वर्ष: 2026 | भाषा: हिंदी | अध्याय: १० | संदर्भ: १८+




About this Book (English):

This academic work in Hindi analyzes the philosophical roots of global violence, expansionism, and inequality. It contrasts Western Individualism with India's Vasudhaiva Kutumbakam philosophy through 10 chapters including case studies on the US, Israel, Iran, and South Asian communal violence.




Author: Ajay Singh Chauhan | Publisher: GBSBFORYOU Publications, Bhopal, MP | 2026

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