गणेश तंत्र साधना
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गणेश जी को सनातन परंपरा में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता का स्थान प्राप्त है — विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और समस्त गणों के स्वामी। यह पुस्तक गणेश साधना को उसकी संपूर्णता में समझने का एक प्रामाणिक प्रयास है।
इस पुस्तक की यात्रा गणपत्य संप्रदाय की प्राचीन परंपरा और भारत के बाहर फैली गणेश-भक्ति से आरंभ होती है, साधकों के वास्तविक जीवन के अनुभवों — रोग, ऋण और सिद्धि — से होकर गुजरती है, गणेश जी के विविध रंग-रूपों और मूर्ति-ध्यान के गूढ़ रहस्यों को खोलती है, यंत्र-साधना की गहराई में उतरती है, और अंततः गणपति अथर्वशीर्ष, एकाक्षर मंत्र तथा गणेश गायत्री की महिमा तक पहुँचती है।
दस अध्यायों में फैली यह पुस्तक न केवल परंपरा और शास्त्र का प्रामाणिक दस्तावेज़ है, बल्कि हर उस साधक के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक भी है, जो अपने जीवन में स्थिरता, स्पष्टता और शांति की खोज में है। पुस्तक श्रद्धा और समझ के बीच संतुलन बनाए रखते हुए यह भी सिखाती है कि सच्ची साधना का फल तभी पूर्ण होता है, जब वह स्वयं तक सीमित न रहकर समाज के कल्याण में भी झलके।
गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया।