पितृ दोष और पितृ पक्ष
पितृ दोष और पितृ पक्ष: आपके परिवार को परेशान करने वाली अड़चनों का एक पुराना उत्तर
जीवन में कई बार ऐसे दौर आते हैं जब मेहनत करने पर भी सफलता हाथ नहीं लगती, रिश्तों में बेवजह तनाव बना रहता है, या घर में लगातार एक के बाद एक परेशानियाँ आती रहती हैं। ऐसे समय कई परिवारों में एक पुराना सवाल उठता है — "कहीं हमारे पितरों का कुछ अधूरा तो नहीं रह गया?"
भारतीय संस्कृति में पूर्वजों को, यानी "पितरों" को अत्यंत आदर और श्रद्धा का स्थान दिया गया है। हमारे माता-पिता, दादा-दादी और उनसे भी पहले की पीढ़ियों ने दिए संस्कार और आशीर्वाद के कारण ही हमारा अस्तित्व संभव हुआ है, ऐसी श्रद्धा है। जब इन पूर्वजों का यथोचित स्मरण, श्राद्ध अथवा तर्पण नहीं होता, तब ज्योतिषशास्त्र में इसे "पितृ दोष" कहा जाता है — और इसका प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता, विवाह और रिश्तों पर पड़ता है, ऐसा माना जाता है।
लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं। हर साल भाद्रपद महीने में आने वाला "पितृ पक्ष" यह सोलह दिनों का समय खासतौर पर इसी के लिए होता है — पूर्वजों का स्मरण करके, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए। सरल जलतर्पण, एक बार का अन्नदान, या रोज सुबह दो मिनट शांति से बैठकर पूर्वजों का मनोभाव से स्मरण करना — इतना भी अगर निरंतर किया जाए, तो कई परिवारों को समय के साथ घर में शांति और स्थिरता महसूस होने की बात कही जाती है।
पितृ दोष और पितृ पक्ष — कारण, परिणाम, उपाय, मंत्र-स्तोत्र-यंत्र और पठन नियम
पूर्वजों के आशीर्वाद से जीवन के अवरोध दूर करने का एक श्रद्धापूर्ण, संपूर्ण मार्गदर्शक। इस ईबुक में पितृ दोष क्या है, उसे कैसे पहचानें, उसके पारिवारिक-आर्थिक-स्वास्थ्य संबंधी परिणाम, पितृ पक्ष के नियम, निवारण के लिए मंत्र-स्तोत्र-यंत्र, ४० दिनों की साधना योजना और सामान्य प्रश्नोत्तर — यह सब सरल हिंदी भाषा में, पारंपरिक धर्मग्रंथों और ज्योतिषशास्त्र के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। हर घर के लिए उपयोगी यह एक संपूर्ण संदर्भ-ग्रंथ है।