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Kishte

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इस किताब में सिर्फ़ कविताएँ नहीं हैं, इसमें मैंने निचोड़ दिया है अभी तक का जिया हुआ जीवन। इस जीवन में सब कुछ रहा, प्यार - दुलार, इश्क़ - मोहब्बत, जुनून - पागलपन, सुख - दुःख, पर जो सबसे ज्यादा रहा वो मैं हूँ। अब इन सबको आप सबसे साझा कर के मैं, मैं से हम हो जाना चाहता हूँ। और हम समर्पित करते हैं ये पहली किताब उसे, जिसने हमें पहला अक्षर सिखाया।
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