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Bas ab aur nahi

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ये पुस्तक मैंने और मेरे सहायक रचनाकारों के अथक प्रयास का नतीजा है। मेरी 25 सुनहरी पंखुड़ियों(रचनाकारों) के बिना मेरा ये सपना कभी पूरा नही हो सकता था।सभी रचनाकार अपने आप मे एक खास इंसान हैं जिनकी भावनायें कागज़ पर इस तरह उतरी की जैसे कोई घटना हमारे सामने घटित हो रही और अब हिम्मत करो और आवाज़ उठाओ और बोलो"बस-अब और नही"।इस पुस्तक में हमने उन विषयों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया है जो आये दिन समाज में अन्याय होते हैं और हम उन अन्यायों के खिलाफ आवाज़ नही उठा पाते। कृपया आप अपने प्यार और सहयोग से हमारी इस कृति का मान बढ़ाएं।
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