बे-निशान
तीन साल पहले, दिल्ली पुलिस के एक होनहार जासूस विक्रम राठौर ने एक ही रात में अपना सब कुछ खो दिया था। अब वह गोवा में एक गुमनाम ज़िंदगी जी रहा है, जहाँ व्हिस्की की बोतल ही उसकी सबसे अच्छी दोस्त है। लेकिन जब एक बेबस माँ उसे अपनी लापता बेटी को ढूँढ़ने का केस सौंपती है, तो विक्रम अनजाने में ही एक ऐसे खेल में उतर जाता है जहाँ नियम भी शैतान लिखता है और सज़ा भी वही देता है। यह hindi crime thriller novel आपको एक ऐसे सफ़र पर ले जाएगा जहाँ हर मोड़ पर धोखा और मौत इंतज़ार कर रही है।
जैसे-जैसे विक्रम इस केस की परतें खोलता है, उसे पता चलता है कि वह सिर्फ़ एक ड्रग सिंडिकेट का सामना नहीं कर रहा है। उसका दुश्मन एक अदृश्य, ख़ौफ़नाक हस्ती है—'द फार्मासिस्ट'। एक ऐसा मास्टरमाइंड जो अपने दुश्मनों को सिर्फ़ मारता नहीं, बल्कि उनकी पूरी पहचान को मिटा देता है। जब विक्रम को इस साज़िश के तार अपनी ही ज़िंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी से जुड़े हुए मिलते हैं, तो यह केस उसके लिए इंतक़ाम का एक निजी मिशन बन जाता है। यह एक क्लासिक Indian noir mystery है, जिसमें एक नायक अपने अंदर के राक्षस से लड़ते हुए बाहर के राक्षसों का शिकार करता है।
'द फार्मासिस्ट' के प्रशिक्षित हत्यारों और एक भ्रष्ट सिस्टम के ख़िलाफ़, विक्रम की यह लड़ाई उसे गोवा के रंगीन कार्निवल की रात में, मोरमुगाओ पोर्ट के अँधेरे कोनों तक ले जाती है। यह सिर्फ़ एक लड़की को ढूँढ़ने की कहानी नहीं है। यह एक बाप के बदले की, एक टूटे हुए इंसान के न्याय की, और उस अँधेरे से लड़ने की रहस्यमयी कहानी है जो ख़ूबसूरत नज़ारों के पीछे छिपा होता है। क्या विक्रम अपना इंतक़ाम पूरा कर पाएगा, या वह ख़ुद एक और भूत बनकर गोवा के अँधेरे में खो जाएगा?