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अस्तित्व की बिसात

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एक वास्तुकार। एक साम्राज्य। एक प्रतिशोध।


आदित्य सिंह का जीवन सधी हुई रेखाओं और अनुमानित समीकरणों पर बना था. लंदन के सबसे सफल वास्तुकारों में से एक के रूप में, उसने अपने अतीत—मुंबई के अंडरवर्ल्ड की ख़ूनी और अराजक दुनिया—को सफलतापूर्वक पीछे छोड़ दिया था, एक ऐसी दुनिया जिस पर उसके पिता, वीर सिंह, का शासन था. लेकिन एक फ़ोन कॉल सब कुछ बदल देती है. उसके पिता की हत्या हो चुकी है, और आदित्य को उस जंगल में वापस लौटना पड़ता है जिसे उसने कभी घर कहा था, जहाँ अब उसकी बहन की जान भी ख़तरे में है.


मुंबई की सत्ता की बिसात पर, आदित्य ख़ुद को एक बड़ी और गहरी Corporate Conspiracy के केंद्र में पाता है, जहाँ राजनीति, अपराध और कॉर्पोरेट जगत के बीच की रेखाएं धुंधली हैं. उसका दुश्मन सिर्फ़ एक प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर, इक़बाल राणे, नहीं है, बल्कि एक अदृश्य, शक्तिशाली 'गड़रिया' है जो पर्दे के पीछे से पूरे शहर को नियंत्रित करता है. बचने के लिए, आदित्य को अपने पिता की पुरानी, हिंसक सल्तनत को एक नए, ख़ामोश और ज़्यादा घातक निज़ाम में बदलना होगा. वह गोलियों से नहीं, बल्कि दिमाग़ से लड़ता है; वह सड़कों पर नहीं, बल्कि स्टॉक मार्केट और डिजिटल दुनिया में Corporate Warfare छेड़ता है. 


यह एक ऐसे Anti-Hero की कहानी है जो व्यवस्था को तोड़ने के लिए ख़ुद एक ज़्यादा क्रूर व्यवस्था का निर्माण करता है. "अस्तित्व की बिसात" एक रोमांचक Hindi Crime Thriller है जो आपको मुंबई के अपराध जगत की अँधेरी गलियों से लेकर सत्ता के चमकदार गलियारों तक ले जाएगा, जहाँ हर क़दम पर धोखा है और हर चाल जानलेवा हो सकती है. क्या एक वास्तुकार, जो इमारतें बनाने के लिए जाना जाता है, एक पूरे साम्राज्य को ध्वस्त कर पाएगा, या इस प्रक्रिया में वह अपनी ही बनाई हुई सबसे ख़तरनाक संरचना में क़ैद हो जाएगा?


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