कोयले की राख
धनबाद की कठोर खदानों के दिल में, जहाँ हवा कोयला की धूल और विश्वासघात की बदबू से भरी है, अमेरिका से लौटा रोहन सिंह एक विरासत दावा करने आता है जो रक्त और षड्यंत्र से रंगी हुई है। सिंह खानदान, कभी एक अटूट किला, अब अपने ही भीतर से टूट रहा है – उसके चाचा महेंद्र सिंह ने प्रतिद्वंद्वी कुरेशी खानदान से गुप्त गठबंधन कर लिया है, जो सभी को वफ़ादारी टूटने और विश्वासघात के बोझ तले दबा देना चाहता है। जैसे रोहन धनबाद की गलियों और हवेली की परछाइयों में उतरता है, वह खुद को एक ऐसी जंग में पाता है जहाँ परंपरा और परिवर्तन आपस में टकराते हैं, और हर कदम पर सम्मान दांव पर लगा होता है।
वफ़ादार सिपाही शमशेर और प्रतिभाशाली इंजीनियर अलीशा शर्मा के साथ, रोहन एक ऐसे जाल को उजागर करता है जो पूरे खानदान को गुस्सा, दर्द और उम्मीद के तूफ़ान में घेर लेता है। जंगल के घात से लेकर डिजिटल साज़िशों तक, हर संघर्ष विरासत की कीमत पूछता है। क्या रोहन इस रक्त और न्याय की गाथा में एक नया साम्राज्य गढ़ पाएगा, या पुरानी नफरतें उसे भी भस्म कर देंगी? अपराध कथा, सस्पेंस और परिवारिक नाटक का यह दिल दहला देने वाला मिश्रण धनबाद की खदानों में छिपे रहस्यों को उजागर करता है, जहाँ हर गठबंधन घातक साबित हो सकता है।