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सत्ता का रक्त

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पूर्वांचल की काली गलियों में, न्याय एक मज़ाक है, और प्रतिशोध ही एकमात्र सत्य है। सूरज सिंह, एक पूर्व सेना का कमांडो, जिसने युद्ध के मैदान में दुश्मनों को धूल चटाई थी, अब गाज़ीपुर में एक गुमनाम किसान का जीवन जी रहा है। उसके भीतर एक गहरा घाव है: भैया जी नामक एक क्रूर बाहुबली द्वारा उसके परिवार का निर्मम संहार। जब भैया जी का नशे में धुत बेटा, एक मासूम गाँव की लड़की रूही का अपहरण कर लेता है जिससे सूरज का भावनात्मक लगाव था, और भ्रष्ट पुलिस प्रणाली आँखें मूँद लेती है, तो सूरज का सालों से सोया हुआ गुस्सा जाग उठता है। वर्दी उतारकर, रिवॉल्वर उठाकर, वह अब एक 'भूत' है – एक ऐसा एंटी-हीरो जो न्याय के लिए नहीं, बल्कि केवल अपने परिवार और रूही के लिए भयावह बदला लेने के लिए जीवित है ।



गाज़ीपुर में भैया जी के अवैध शराब के ठिकानों, हथियारों के ज़खीरों और वसूली के गढ़ों पर सूरज के क्रूर और सुनियोजित हमले भयावह आतंक फैलाते हैं, जिससे भैया जी का अभेद्य साम्राज्य हिल जाता है। हर हमला पिछले से ज़्यादा दुस्साहसी और हिंसक होता है, जिससे पुलिस और भैया जी के गुर्गे दोनों एक अदृश्य दुश्मन के पीछे अंधेरे में भागते रहते हैं। जब पत्रकार रिया शर्मा, जो भैया जी के भ्रष्टाचार के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रही है, सूरज से संपर्क करती है, तो उनके बीच एक अनिश्चित गठबंधन बनता है। रिया की कलम और सूरज की बंदूक मिलकर भैया जी पर दबाव बढ़ाते हैं, जिससे उसकी प्रतिष्ठा तार-तार हो जाती है।


जैसे ही सूरज भैया जी के साम्राज्य की जड़ों में घुसता है, वह एक गहरे, भयावह सत्य का पर्दाफाश करता है: यह लड़ाई व्यक्तिगत प्रतिशोध नहीं है, बल्कि लखनऊ में जड़ें जमाए एक राष्ट्रव्यापी हथियार तस्करी नेटवर्क और राज्य के एक शक्तिशाली, भ्रष्ट मंत्री की भयावह साजिश का हिस्सा है। लखनऊ के गैंगस्टर, इक़बाल भाई के साथ एक खतरनाक गठबंधन में उलझकर, सूरज भैया जी के संगठन के भीतर घुसपैठ करता है, लेकिन उसे जल्द ही पता चलता है कि इक़बाल भाई भी उतना ही खतरनाक है जितना भैया जी, और उनके बीच का इतिहास जितना दिखता है उससे कहीं ज़्यादा जटिल है। जब सूरज को पता चलता है कि भैया जी चुनाव के दिन एक बड़ा दंगा भड़काने की योजना बना रहा है ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो सके, तो उसका लक्ष्य व्यक्तिगत बदले से बढ़कर बेगुनाहों को बचाना हो जाता है ।


क्या सूरज इस भयावह साजिश को रोक पाएगा, जब वह एक अपराधी और एक भगोड़ा बन चुका है? भैया जी के किलेबंद पैतृक गाँव में होने वाला अंतिम टकराव, एक रक्तरंजित, विस्फोटक अंत होगा, जहाँ सूरज भैया जी और उसके पूरे परिवार का सफाया कर देता है, लेकिन इस प्रक्रिया में वह खुद कानून की नज़रों में सबसे बड़ा अपराधी बन जाता है। "सत्ता का रक्त" एक बिना रुके चलने वाला, तीव्र थ्रिलर है जो विश्वासघात, सत्ता और बदले की अंधेरी गलियों में आपको अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखेगा। यह कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी: क्या बदला लेने से शांति मिलती है, या यह केवल एक अंतहीन चक्र की शुरुआत है?


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