कितने रहस्य, कितने रिश्ते
एक शाही शादी... एक शानदार महल... और अनगिनत राज़।
समीरा शेखावत की ज़िंदगी किसी परियों की कहानी जैसी है। वह एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य की लाडली बेटी है और उसकी शादी देश के सबसे होनहार नौजवान, विवेक मेहरोत्रा, से होने जा रही है। उदयगढ़ पैलेस में हो रही यह शादी सिर्फ़ दो दिलों का नहीं, बल्कि दो बड़े ख़ानदानों का मिलन है।
पर जब समीरा के अतीत से एक भूला हुआ चेहरा, आदित्य, वापस लौटता है, तो इस ख़ूबसूरत कहानी का सुनहरा पन्ना जलने लगता है। एक के बाद एक, ख़ानदान के गहरे, काले राज़ सामने आने लगते हैं - बीस साल पुरानी एक रहस्यमयी मौत, एक छिपाई हुई वसीयत, और रिश्तों का एक ऐसा जाल जिसमें प्यार एक सौदा है और वफ़ादारी एक धोखा।
जब महल की दीवारों के भीतर एक के बाद एक लाशें गिरने लगती हैं, तो समीरा को एहसास होता है कि वह किसी शादी में नहीं, बल्कि एक ख़ूनी बिसात पर एक मोहरा है।
क्या समीरा उस सच का सामना कर पाएगी जो उसकी अपनी पहचान को चुनौती देता है? जब हर चेहरा एक नक़ाब हो, तो वह किस पर भरोसा करेगी?
"कितने रहस्य, कितने रिश्ते" एक ऐसा रोमांचक उपन्यास है जो प्यार, धोखा, विरासत और बदले की एक ऐसी कहानी बुनता है जो आपको आख़िरी पन्ने तक बांधे रखेगी।