वह जो लौटी नहीं
एक शिक्षिका अनन्या शर्मा अपनी शादी के सपने बुन रही थी। उसका मंगेतर, विवान, उसकी दुनिया था। लेकिन एक बरसात की रात, एक भयानक कार दुर्घटना के बाद, अनन्या किसी परछाईं की तरह गायब हो जाती है, अपने पीछे सिर्फ़ एक टूटा हुआ विवान और अनगिनत अनसुलझे सवाल छोड़कर।
दो साल बीत जाते हैं। विवान, यह मानकर कि अनन्या अब कभी नहीं लौटेगी, एक नया जीवन शुरू कर चुका है और रागिनी से विवाह कर चुका है। लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंज़ूर था। सैकड़ों किलोमीटर दूर, एक शांत पहाड़ी गाँव में, अनन्या 'आनी' बनकर जी रही है। उसे अपनी याददाश्त का एक भी कतरा याद नहीं। उसकी देखभाल आरव कर रहा है, एक खामोश और रहस्यमयी फोटोग्राफर, जो उसे किसी भी दर्दनाक सच से बचाकर रखना चाहता है।
जब परिस्थितियों के कारण अनन्या को उसी शहर में लौटना पड़ता है जिसे वह पीछे छोड़ आई थी, तो उसका सामना विवान से होता है। यह एक ऐसा टकराव है जो भूली हुई स्मृतियों की एक सुनामी को जन्म देता है। अनन्या को धीरे-धीरे एहसास होता है कि उसकी गुमशुदगी कोई हादसा नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साज़िश थी, जिसके तार विवान की नई पत्नी, रागिनी, से जुड़े हो सकते हैं।
अब अनन्या एक भावनात्मक चौराहे पर खड़ी है। एक तरफ विवान है, जो अपने अधूरे प्रेम और अपराध-बोध के साथ लौटा है। दूसरी तरफ आरव है, जो उसकी रक्षा तो करना चाहता है, पर शायद उसे पूरी सच्चाई नहीं बता रहा। जैसे-जैसे राज़ खुलते हैं और खतरे बढ़ते हैं, अनन्या को यह समझना होगा कि खुद को खोजने की लड़ाई उसे अकेले ही लड़नी होगी। यह सिर्फ़ प्यार और धोखे की कहानी नहीं, बल्कि एक स्त्री की अपनी पहचान, अपनी स्वतंत्रता, और अपने अस्तित्व को फिर से गढ़ने की एक असाधारण यात्रा है।