Your Cart
Loading

बालू की सल्तनत

On Sale
$1.15
$1.15
Added to cart

भारत के हृदय में, जहाँ नदियाँ जीवन देती हैं, वहीं वे अब एक 'अदालत' और 'मृत्यु के स्थान' में बदल गई हैं। 'आधुनिक सभ्यता का आधार', रेत, 'नया सोना' बन चुकी है – एक ऐसा संसाधन जिसके लिए हत्या की जा सकती है। अर्जुन सिंह, एक युवा, आदर्शवादी पुलिस उप-निरीक्षक, एक ऐसे जिले में आता है जहाँ 'राजनीतिक भ्रष्टाचार' और 'क्रूर हिंसा' का बोलबाला है। उसकी आँखें तब खुलती हैं जब एक मासूम बच्चा, किसान रामू का बेटा कल्लू, 'रेत माफिया' द्वारा छोड़े गए एक 'गहरे, पानी से भरे गड्ढे' में डूब जाता है। इस 'दुखद घटना' से प्रेरित होकर, अर्जुन अपने आदर्शवाद को त्याग देता है और 'प्रतिशोध' के रास्ते पर चलता है।


उसका संघर्ष उसे एक 'अशुभ गठजोड़' के भीतर ले जाता है – एक 'विकेन्द्रीकृत पारिस्थितिकी तंत्र' जहाँ 'ठेकेदार, राजनेता, नौकरशाह और पुलिस' साझा 'लाभ और आपसी संरक्षण' के लिए मिले हुए हैं। इंस्पेक्टर विक्रम, एक भ्रष्ट लेकिन अंततः प्रायश्चित करने वाला पुलिस अधिकारी, 'हफ़्ता वसूली' के काले तंत्र को उजागर करता है। प्रिया, एक निडर खोजी पत्रकार, अपनी 'कलम' को एक 'शक्तिशाली हथियार' बनाती है, 'मंत्री सत्यपाल' जैसे 'उच्च-स्तरीय संरक्षकों' और रविंदर जैसे 'औद्योगिकपतियों' के काले कारनामों को बेनक़ाब करती है। यह कहानी 'मानवीय शोषण' और 'पर्यावरणीय विनाश' को उजागर करती है, जहाँ 'घड़ियाल' और 'डॉल्फ़िन' जैसे 'लुप्तप्राय प्रजातियाँ' भी माफिया की 'अदम्य लालच' का शिकार बनती हैं।


'डिजिटल युद्ध' से लेकर 'नदी के युद्ध' और 'शहरी घेराव' तक, अर्जुन और उसकी छोटी टीम - रामू, प्रिया, और कुछ वफ़ादार सहयोगी - 'अंतर्राष्ट्रीय समूह' के 'अदृश्य हाथों' को चुनौती देते हैं, जो 'वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं' को नियंत्रित करता है। 'न्याय का मार्ग' 'बलिदान' और 'विश्वासघात' से भरा है, लेकिन अर्जुन हार मानने से इनकार करता है। यह एक 'अधूरी जीत' की कहानी है, जहाँ माफिया के कुछ 'सिर' कट जाते हैं, लेकिन 'सत्ता का चक्र' और 'लालच का विचार' जारी रहता है। क्या अर्जुन का 'अदम्य प्रतिरोध' रेत के इस खूनी साम्राज्य को हमेशा के लिए ध्वस्त कर पाएगा, या यह 'रेत का रक्तपात... जारी' रहेगा?

You will get a EPUB (623KB) file