ईमानदारी के दस्तावेज़
“ईमानदारी के दस्तावेज़” एक अनूठी यात्रा है—जहाँ जीवन की “औपचारिकता” और मानवीय “मौन” के बीच की खाई को एक सच्चा आदमकद बनकर भरने का साहस है। सात दशकों का सफर, एक सरकारी क्लर्क की दृष्टि से, जिसमें दस्तावेज़, स्थानांतरण, पदोन्नति, पेंशन, और अधूरी डायरी प्रविष्टियाँ शामिल हैं। हर अध्याय गतिमान व्यंग्य और प्रकाशित सामाजिक निर्माण की परतों को खोलता है, जबकि लिरिकल भाषा और गहरे भावनात्मक अंतर्संबंध से मालामाल है।
यह उपन्यास सिर्फ व्यंग्य नहीं है—यह एक मनोवैज्ञानिक ग्रंथ है, जहां पात्र अपने आत्मिक सच्चाई और संस्थागत दबाव के बीच झूलता है। पाठकों को मिलेगा डार्क ह्यूमर, अनुशासनात्मक चुप्पी, और मन की अंतर्दाहक कहानियाँ। यदि आप भारतीय सामाजिक-राजनीतिक जीवन के बार-बार अनमोड़ प्रक्रियाओं पर झक्कास व्यंग्य और गहन मानवीय विश्लेषण पढ़ना चाहते हैं, तो यह कृति आपके लिए है।